नवग्रह शांति पूजा

हमारी प्रमुख पूजा एवं अनुष्ठान

Navagraha Shanti Puja

नौ ग्रहों की वैदिक आराधना एवं ग्रह शांति के लिए विशेष अनुष्ठान

सनातन वैदिक परंपरा में नवग्रह का विशेष धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व माना जाता है। नवग्रहों में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु को शामिल किया जाता है।

नवग्रह शांति पूजा एक विशेष वैदिक अनुष्ठान है जिसमें सभी नौ ग्रहों की श्रद्धापूर्वक पूजा, मंत्र जाप, प्रार्थना एवं निर्धारित धार्मिक विधियाँ संपन्न की जाती हैं। इस पूजा का उद्देश्य ग्रहों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए जीवन में शांति, संतुलन, स्थिरता और मंगल की प्रार्थना करना है।

राहु मंदिर पैठाणी में नवग्रह शांति पूजा गुरुकुल के आचार्यों, शिक्षकों एवं ब्रह्मचारी बटुकों द्वारा पारंपरिक वैदिक विधि-विधान और आचार्यों के मार्गदर्शन में संपन्न कराई जाती है।

यह पूजा उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक अनुष्ठान का माध्यम हो सकती है जो अपनी जन्म कुंडली अथवा धार्मिक संकल्प के अनुसार नवग्रहों की सामूहिक आराधना करना चाहते हैं।

नवग्रह शांति पूजा में क्या-क्या किया जाएगा?

नवग्रह शांति पूजा केवल नौ ग्रहों के नाम का जाप करने तक सीमित नहीं है। यह एक क्रमबद्ध वैदिक अनुष्ठान है, जिसमें पूजा, संकल्प, ग्रह आराधना, मंत्र एवं स्तोत्र पाठ, हवन और अन्य धार्मिक प्रक्रियाएँ शामिल हो सकती हैं।

पूजा की वास्तविक विधि, मंत्र जाप की संख्या और अन्य अनुष्ठानिक प्रक्रियाएँ यजमान के संकल्प तथा आचार्यों के मार्गदर्शन के अनुसार निर्धारित की जा सकती हैं।

1. पूजा स्थल की तैयारी

सबसे पहले पूजा के लिए निर्धारित स्थान को स्वच्छ एवं व्यवस्थित किया जाता है।

गणेश पूजन, कलश स्थापना, नवग्रह पूजा, पूजा वेदी, हवन तथा आचार्यों एवं बटुक ब्रह्मचारियों के बैठने के लिए आवश्यक व्यवस्था की जाती है।

नवग्रह अनुष्ठान विस्तृत होने के कारण पूजा स्थल पर पर्याप्त स्थान होना आवश्यक है।

2. भगवान गणेश का पूजन

शुभ धार्मिक अनुष्ठान का प्रारंभ भगवान गणेश के स्मरण एवं पूजन से किया जाता है।

भगवान गणेश से पूजा के निर्विघ्न रूप से संपन्न होने तथा संपूर्ण अनुष्ठान को सफलतापूर्वक पूरा करने की प्रार्थना की जाती है।

3. संकल्प

संकल्प नवग्रह शांति पूजा का महत्वपूर्ण प्रारंभिक चरण है।

यजमान का नाम, गोत्र, जन्म तिथि तथा आवश्यक जन्म संबंधी जानकारी के आधार पर संकल्प लिया जा सकता है।

संकल्प में पूजा कराने का उद्देश्य भी शामिल किया जाता है। इसके बाद निर्धारित विधि के अनुसार नवग्रह पूजा और मंत्र जाप प्रारंभ किया जाता है।

4. कलश स्थापना एवं देव आवाहन

पूजा की परंपरा के अनुसार कलश स्थापना एवं संबंधित देवी-देवताओं का आवाहन किया जाता है।

इसके बाद नौ ग्रहों की पूजा के लिए आवश्यक धार्मिक व्यवस्था पूरी की जाती है।

5. नवग्रहों का पूजन

नवग्रह शांति पूजा में नौ ग्रहों की क्रमबद्ध आराधना की जाती है:

  • सूर्य
  • चंद्र
  • मंगल
  • बुध
  • गुरु या बृहस्पति
  • शुक्र
  • शनि
  • राहु
  • केतु

वैदिक परंपरा में इन नौ ग्रहों की पूजा और मंत्रों के माध्यम से उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है।

प्रत्येक ग्रह के लिए निर्धारित पूजा सामग्री, पुष्प, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य एवं संबंधित मंत्रों का उपयोग अनुष्ठान की विधि के अनुसार किया जा सकता है।

6. नवग्रह मंत्र एवं स्तोत्र पाठ

नवग्रह पूजा में संबंधित ग्रहों के मंत्रों और नवग्रह स्तोत्र का पाठ किया जा सकता है।

आचार्यों के मार्गदर्शन में सूर्य से लेकर केतु तक प्रत्येक ग्रह की आराधना निर्धारित मंत्रों के साथ की जाती है।

मंत्र जाप की संख्या और अवधि पूजा के संकल्प तथा अनुष्ठान की प्रकृति के अनुसार तय की जाएगी।

7. ग्रहों के लिए विशेष प्रार्थना

पूजा के दौरान प्रत्येक ग्रह के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए यजमान एवं उनके परिवार के लिए शांति, संतुलन, सद्बुद्धि, स्थिरता और मंगल की प्रार्थना की जाती है।

यदि पूजा किसी विशेष धार्मिक या ज्योतिषीय उद्देश्य से कराई जा रही है, तो उस उद्देश्य को संकल्प और प्रार्थना में शामिल किया जा सकता है।

8. नवग्रह हवन

विस्तृत नवग्रह शांति अनुष्ठान में हवन एक महत्वपूर्ण चरण हो सकता है।

पवित्र अग्नि स्थापित करके निर्धारित विधि के अनुसार नवग्रहों से संबंधित मंत्रों के साथ आहुतियाँ दी जाती हैं।

हवन आचार्यों के मार्गदर्शन में धार्मिक विधि के अनुसार संपन्न कराया जाता है।

9. पूर्णाहुति

निर्धारित हवन एवं आहुतियों के पूर्ण होने के बाद पूर्णाहुति दी जाती है।

पूर्णाहुति के साथ हवन के मुख्य धार्मिक चरण का समापन किया जाता है और यजमान एवं उनके परिवार के लिए मंगलकामना की जाती है।

10. आरती एवं प्रार्थना

हवन एवं पूर्णाहुति के बाद नवग्रहों की आरती एवं प्रार्थना की जाती है।

ईश्वर से यजमान एवं उनके परिवार के लिए शांति, सद्बुद्धि, आध्यात्मिक शक्ति, स्थिरता एवं मंगल की प्रार्थना की जाती है।

11. अंतिम अभिषेक एवं प्रसाद

अनुष्ठान की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अंतिम धार्मिक चरण पूरा किया जाता है।

नवग्रह शांति पूजा के बाद अंतिम अभिषेक राहु मंदिर पैठाणी में ही किया जाएगा।

अंतिम पूजा एवं प्रार्थना के बाद यजमान को प्रसाद प्रदान किया जाएगा।

नवग्रह शांति पूजा कौन कराएगा?

राहु मंदिर पैठाणी में नवग्रह शांति पूजा गुरुकुल के आचार्यों, शिक्षकों एवं ब्रह्मचारी बटुकों द्वारा संपन्न कराई जाएगी।

गुरुकुल के ब्रह्मचारी बटुक पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था में संस्कृत, वेद, कर्मकांड, मंत्रोच्चार एवं धार्मिक अनुष्ठानों का अध्ययन करते हैं।

नवग्रह पूजा एवं मंत्र जाप आचार्यों के मार्गदर्शन में उचित धार्मिक विधि, अनुशासन, श्रद्धा और समर्पण के साथ कराया जाएगा।

पूजा की प्रकृति के अनुसार यजमान को संकल्प या अन्य निर्धारित धार्मिक चरणों में सहभागी होने का अवसर भी दिया जा सकता है।

नवग्रह शांति पूजा कैसे शुरू होगी?

पूजा प्रारंभ करने से पहले यजमान से आवश्यक जानकारी प्राप्त की जाएगी।

इसमें आवश्यकता के अनुसार:

  • यजमान का नाम
  • गोत्र
  • जन्म तिथि
  • आवश्यक जन्म विवरण
  • संपर्क जानकारी
  • पूजा का उद्देश्य
  • पूजा के लिए इच्छित तिथि
  • उपलब्ध होने पर जन्म कुंडली

शामिल हो सकते हैं।

आवश्यक जानकारी और पूजा की व्यवस्था पूरी होने के बाद निर्धारित स्थान पर अनुष्ठान प्रारंभ किया जाएगा।

पूजा की सामान्य शुरुआत इस प्रकार हो सकती है:

पूजा स्थल की तैयारी → गणेश पूजन → संकल्प → कलश स्थापना → देव आवाहन → नवग्रह पूजन → नवग्रह मंत्र एवं स्तोत्र पाठ

इसके बाद निर्धारित अनुष्ठान के अनुसार हवन एवं अन्य धार्मिक प्रक्रियाएँ संपन्न की जाएँगी।

नवग्रह शांति पूजा का समापन कैसे होगा?

नवग्रहों की पूजा, मंत्र जाप एवं निर्धारित धार्मिक प्रक्रियाएँ पूर्ण होने के बाद अनुष्ठान के अंतिम चरण शुरू होंगे।

सामान्य रूप से समापन की प्रक्रिया में:

नवग्रह मंत्र जाप → हवन → पूर्णाहुति → अंतिम अभिषेक → आरती → प्रार्थना → प्रसाद

शामिल हो सकते हैं।

अंतिम अभिषेक राहु मंदिर पैठानी में ही किया जाएगा।

पूजा के अंत में यजमान एवं उनके परिवार के लिए शांति, मंगल, सद्बुद्धि, आध्यात्मिक शक्ति और ईश्वर की कृपा की प्रार्थना की जाएगी।

पूजा के स्थान का चयन

पूजा को वैदिक विधि-विधान के अनुसार पूर्ण रूप से संपन्न कराने के लिए पर्याप्त स्थान का होना आवश्यक है। गणेश पूजन, कलश स्थापना, पूजा वेदी एवं भद्र की व्यवस्था के साथ-साथ मंत्र जाप और अनुष्ठान में सम्मिलित होने वाले बटुक ब्रह्मचारियों एवं आचार्यों के बैठने के लिए भी पर्याप्त स्थान आवश्यक होता है।

राहु मंदिर के मुख्य पूजा स्थल पर इन सभी व्यवस्थाओं के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है। साथ ही मंदिर में नियमित पूजा, दर्शन एवं अन्य धार्मिक गतिविधियाँ भी संचालित होती रहती हैं। इसलिए विस्तृत पूजा-अनुष्ठान को मंदिर के मुख्य पूजा स्थल पर कई घंटों तक करना व्यावहारिक नहीं है।

मंदिर के पास स्थान लेकर पूजा

यदि यजमान मंदिर के निकट पूजा कराना चाहते हैं, तो उन्हें पूजा के लिए एक उपयुक्त स्थान किराए पर लेना होगा। उस स्थान पर गणेश पूजन, कलश स्थापना, भद्र निर्माण, संकल्प, मंत्र जाप एवं अन्य आवश्यक धार्मिक प्रक्रियाओं के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी।

मंदिर के पास किराए पर लिए जाने वाले स्थान की बुकिंग एवं किराए का पूरा खर्च यजमान को स्वयं वहन करना होगा।

गुरुकुल में पूजा

यजमान के लिए दूसरा और अधिक सुविधाजनक विकल्प गुरुकुल में पूजा कराना है। गुरुकुल में विस्तृत पूजा, संकल्प, मंत्र जाप, पाठ एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध है।

गुरुकुल में पूजा कराने के लिए किसी प्रकार का स्थान किराया नहीं लिया जाता है। यहाँ बटुक ब्रह्मचारियों एवं आचार्यों के बैठने, पूजा सामग्री की व्यवस्था और विस्तृत अनुष्ठान को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध है।

गुरुकुल का वातावरण शांत, सात्त्विक एवं आध्यात्मिक है, जो लंबे समय तक चलने वाले मंत्र जाप और वैदिक अनुष्ठान के लिए उपयुक्त है।

पूजा के बाद अंतिम अभिषेक एवं धार्मिक अनुष्ठान

यदि पूजा का मुख्य भाग गुरुकुल में संपन्न कराया जाता है, तो अनुष्ठान के अंतिम चरण में अंतिम अभिषेक राहु मंदिर पैठानी में ही किया जाएगा।

इस प्रकार पूजा एवं मंत्र जाप का विस्तृत भाग गुरुकुल के शांत एवं पर्याप्त स्थान वाले वातावरण में संपन्न होगा, जबकि पूजा के अंतिम चरण में यजमान की ओर से राहु मंदिर पैठानी में अभिषेक एवं निर्धारित अंतिम धार्मिक विधि संपन्न कराई जाएगी।

इस व्यवस्था से विस्तृत अनुष्ठान के लिए गुरुकुल की पर्याप्त सुविधाओं का उपयोग भी होता है और पूजा का अंतिम धार्मिक चरण राहु मंदिर पैठानी में श्रद्धापूर्वक संपन्न किया जाता है।

पूजा के बाद भंडारा एवं अन्नदान

यदि कोई श्रद्धालु पूजा के बाद भंडारा या अन्नदान के रूप में सेवा करना चाहता है, तो वह गुरुकुल के बटुक ब्रह्मचारियों एवं विद्वान आचार्यों के लिए भोजन की व्यवस्था में सहयोग कर सकता है।

श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार:

  • गुरुकुल के लिए भोजन सामग्री दान कर सकते हैं।
  • एक समय के भोजन की व्यवस्था का खर्च वहन कर सकते हैं।
  • बटुक ब्रह्मचारियों के लिए सात्त्विक भोजन की सेवा कर सकते हैं।
  • अन्न एवं आवश्यक खाद्य सामग्री के रूप में सहयोग कर सकते हैं।

सनातन परंपरा में अन्नदान और ब्राह्मण भोज को श्रद्धा एवं सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। धार्मिक अनुष्ठान के बाद भोजन सेवा करना कृतज्ञता और सेवा भाव की सुंदर अभिव्यक्ति हो सकती है।

ब्राह्मण एवं वेदाध्ययन में संलग्न विद्वानों को श्रद्धापूर्वक अन्न एवं दान देना सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है। श्रद्धा से किया गया अन्नदान एवं ब्राह्मण सेवा एक श्रेष्ठ धार्मिक सेवा मानी जाती है।

पूजा के लिए आवश्यक जानकारी

पूजा निर्धारित करने से पहले यजमान को पूजा की तिथि, समय, नाम, गोत्र और जन्म संबंधी आवश्यक जानकारी उपलब्ध करानी होगी।

पूजा की विस्तृत विधि, अवधि, स्थान और आवश्यक सामग्री से संबंधित जानकारी पूजा बुकिंग के समय प्रदान की जाएगी।

पूजा की तिथि एवं समय उपलब्धता तथा अनुष्ठान की आवश्यकताओं के अनुसार निर्धारित किया जाएगा।

पूजा-अनुष्ठान की धार्मिक पद्धति एवं आवश्यक सूचना

हमारे आचार्यों एवं शुद्ध ब्रह्मचारी बटुकों द्वारा संपन्न कराई जाने वाली सभी पूजाएँ पारंपरिक धार्मिक विधि-विधान, वैदिक पद्धति एवं प्रचलित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा, आस्था और पूर्ण समर्पण भाव के साथ आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न की जाती हैं।

संस्था का उद्देश्य श्रद्धालुओं को शास्त्रोक्त एवं पारंपरिक पूजा-अनुष्ठान की धार्मिक सेवा उपलब्ध कराना है। पूजा-अनुष्ठान के माध्यम से किसी प्रकार के चमत्कार, निश्चित परिणाम, असाधारण लाभ या भविष्य में होने वाली किसी विशेष घटना की गारंटी का दावा संस्था द्वारा नहीं किया जाता है।

पूजा एक श्रद्धा एवं आस्था का विषय है। इसके आध्यात्मिक या धार्मिक फल को लेकर किसी भी प्रकार का झूठा आश्वासन या भ्रामक दावा संस्था की ओर से नहीं किया जाता। हमारे आचार्य एवं ब्रह्मचारी बटुक अपनी ओर से पूजा एवं मंत्र-जाप को पूरी निष्ठा, शुद्धता, ईमानदारी और श्रद्धा के साथ संपन्न करते हैं।

ईश्वर की कृपा एवं पूजा का अंतिम फल परमात्मा की इच्छा और भक्त की श्रद्धा पर निर्भर है।

धनवापसी संबंधी अंतिम शर्त

किसी भी परिस्थिति में पूजा के लिए दी गई धनराशि वापस नहीं की जाएगी।

पूजा की तिथि या समय में किसी अपरिहार्य कारण से परिवर्तन होने पर संस्था परिस्थितियों और उपलब्धता के अनुसार पूजा को आगे की तिथि पर कराने का प्रयास कर सकती है।

ईश्वर की कृपा और आशीर्वाद आप एवं आपके परिवार पर सदैव बना रहे।

ॐ स्वस्ति प्रजाभ्यः परिपालयन्तां
न्याय्येन मार्गेण महीं महीशाः।
गोब्राह्मणेभ्यः शुभमस्तु नित्यं
लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु॥

हमारी वेबसाइट का उद्देश्य एवं क्षेत्रीय विकास में योगदान

इस वेबसाइट को विकसित करने का मुख्य उद्देश्य राहु मंदिर पैठाणी, माँ बुंखाल कालिंका सिद्धपीठ, तारा कुंड मंदिर तथा क्षेत्र के अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक एवं प्राकृतिक स्थलों को एक विश्वसनीय डिजिटल मंच के माध्यम से श्रद्धालुओं और पर्यटकों तक पहुँचाना है।

हमारा प्रयास है कि इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिरों, धार्मिक परंपराओं, पूजा-अनुष्ठानों, यात्रा मार्ग, ठहरने की सुविधाओं और क्षेत्र से संबंधित आवश्यक जानकारी सरल एवं विश्वसनीय रूप में उपलब्ध हो सके।

धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित होने की संभावना है। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ गुरुकुल के विद्यार्थियों को भी अपनी शिक्षा के साथ विभिन्न सेवा एवं रोजगार के अवसर प्राप्त करने में सहायता मिल सकती है।

हमारा उद्देश्य केवल मंदिरों की जानकारी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि धार्मिक पर्यटन, स्थानीय विकास, गुरुकुल की शिक्षा व्यवस्था और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को एक साथ बढ़ावा देना है।

इस पहल के माध्यम से हम चाहते हैं कि अधिक से अधिक श्रद्धालु क्षेत्र की धार्मिक एवं प्राकृतिक विरासत से परिचित हों, यहाँ आएँ और स्थानीय समुदाय तथा गुरुकुल के विकास में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएँ।

नवग्रह शांति पूजा के लिए अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवग्रह शांति पूजा नौ ग्रहों की सामूहिक वैदिक आराधना के लिए किया जाने वाला धार्मिक अनुष्ठान है। इसमें सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु की विधिपूर्वक पूजा, मंत्र जाप, प्रार्थना तथा निर्धारित विधि के अनुसार हवन और पूर्णाहुति की जाती है।

नवग्रह शांति पूजा में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु अथवा बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु की पूजा की जाती है। प्रत्येक ग्रह के लिए संबंधित धार्मिक विधि, मंत्र और प्रार्थना की परंपरा के अनुसार अनुष्ठान संपन्न किया जाता है।

धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं में नवग्रहों का मानव जीवन से विशेष संबंध माना गया है। नवग्रह शांति पूजा के माध्यम से श्रद्धालु सभी ग्रहों की आराधना करके जीवन में शांति, संतुलन, मंगल और ईश्वर की कृपा के लिए प्रार्थना करते हैं। पूजा का उद्देश्य यजमान के संकल्प और धार्मिक आवश्यकता के अनुसार निर्धारित किया जाता है।

संकल्प पूजा का महत्वपूर्ण धार्मिक अंग है। इसमें यजमान का नाम, गोत्र, जन्म संबंधी विवरण और पूजा का उद्देश्य लेकर विधिपूर्वक प्रार्थना की जाती है। आवश्यकता के अनुसार जन्म कुंडली से संबंधित जानकारी भी पूजा की तैयारी में उपयोग की जा सकती है।

नवग्रह शांति पूजा में पूजा स्थल की तैयारी और शुद्धिकरण, गणेश पूजन, संकल्प, कलश स्थापना, देव आवाहन, नौ ग्रहों का क्रमबद्ध पूजन, नवग्रह मंत्र एवं स्तोत्र पाठ, ग्रहों के लिए विशेष प्रार्थना, हवन, पूर्णाहुति, आरती और प्रसाद जैसी धार्मिक विधियां सम्मिलित की जा सकती हैं।

हां, नवग्रह शांति पूजा में सभी नौ ग्रहों की धार्मिक मान्यता के अनुसार क्रमबद्ध आराधना की जाती है। प्रत्येक ग्रह के लिए संबंधित मंत्र, पूजा सामग्री और प्रार्थना की विधि अनुष्ठान की निर्धारित पद्धति के अनुसार रखी जा सकती है।

मंत्र जाप नवग्रह पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रत्येक ग्रह से संबंधित वैदिक मंत्रों और स्तोत्रों का पाठ धार्मिक विधि के अनुसार किया जा सकता है। मंत्र जाप की संख्या और अवधि यजमान के संकल्प, अनुष्ठान की प्रकृति तथा आचार्यों के मार्गदर्शन के अनुसार निर्धारित की जाती है।

हां, निर्धारित अनुष्ठान के अनुसार नवग्रह शांति पूजा में हवन किया जाता है। वैदिक मंत्रों के साथ अग्नि में निर्धारित सामग्री की आहुति दी जाती है और अंत में पूर्णाहुति के साथ हवन की धार्मिक प्रक्रिया पूरी की जाती है।

नवग्रह शांति पूजा की अवधि सभी अनुष्ठानों के लिए समान नहीं होती। पूजा की विधि, संकल्प, मंत्र जाप की संख्या और अनुष्ठान की प्रकृति के अनुसार इसकी अवधि अलग हो सकती है। निर्धारित समय की जानकारी पूजा की योजना बनाते समय दी जाती है।

नवग्रह शांति पूजा मंदिर और गुरुकुल से जुड़े आचार्यों, शिक्षकों तथा प्रशिक्षित ब्रह्मचारी बटुकों द्वारा करवाई जाती है। मंत्रोच्चार, ग्रह पूजन, हवन और अन्य धार्मिक विधियां आचार्यों के मार्गदर्शन में वैदिक परंपरा के अनुसार संपन्न की जाती हैं।

नवग्रह शांति पूजा मंदिर के आसपास उपलब्ध स्थान लेकर या गुरुकुल में करवाई जा सकती है। मंदिर के पास स्थान लेने पर निर्धारित किराया यजमान द्वारा वहन किया जाता है। गुरुकुल में पर्याप्त स्थान उपलब्ध होने पर पूजा के लिए अलग स्थान किराया नहीं लिया जाता।

गुरुकुल में नवग्रह शांति पूजा करवाने पर विस्तृत धार्मिक अनुष्ठान के लिए शांत और सात्त्विक वातावरण उपलब्ध होता है। पर्याप्त स्थान होने पर मंत्र जाप, पाठ, हवन तथा अन्य धार्मिक विधियां व्यवस्थित रूप से संपन्न की जा सकती हैं। गुरुकुल में पूजा पूर्ण होने के बाद अंतिम अभिषेक और संबंधित समापन धार्मिक प्रक्रिया राहु मंदिर पैठाणी में की जाती है।

पूजा की तैयारी के लिए यजमान का नाम, गोत्र, जन्म तिथि, जन्म समय, जन्म स्थान और पूजा का उद्देश्य जैसी जानकारी आवश्यक हो सकती है। उपलब्ध होने पर जन्म कुंडली से संबंधित जानकारी भी उपयोगी हो सकती है। पूजा की तिथि, समय, विधि और आवश्यक सामग्री की जानकारी पूजा निर्धारित करते समय दी जाती है।

ऑनलाइन पूजा की सुविधा उपलब्ध होने पर श्रद्धालु अपने स्थान से संकल्प के माध्यम से नवग्रह शांति पूजा में सम्मिलित हो सकते हैं। ऑनलाइन पूजा की प्रक्रिया, आवश्यक जानकारी, मंत्र जाप तथा पूजा से संबंधित अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी बुकिंग के समय दी जाती है।

नवग्रह शांति पूजा की तिथि, समय, विधि, मंत्र जाप, हवन, गुरुकुल में ठहरने तथा अन्य जानकारी के लिए सीधे संपर्क किया जा सकता है। पूजा के लिए दी गई धनराशि किसी भी परिस्थिति में वापस नहीं की जाती। यदि तिथि या समय में परिवर्तन आवश्यक हो, तो परिस्थितियों और उपलब्धता के अनुसार उसे बदलने का प्रयास किया जा सकता है।

पूजा के लिए, गुरुकुल में ठहरने के लिए और अधिक जानकारी के लिए हमसे संपर्क करें।

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